देहरादून (डा. बिलाल अन्सारी) : उत्तराखंड शिवसेना में राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति के खिलाफ शिवसैनिकों में आक्रोश पनप रहा है। उत्तराखंड शिवसेना के प्रदेश प्रमुख महासचिव अखिल शर्मा एडवोकेट ने बताया कि राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति ने अनर्गल एवं बेबुनियाद आरोप लगाकर निराधार तथ्यों को न्यूज के माध्यम से पहाड़ी मूल के कर्मठ शिवसैनिकों को राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अदसूल का आदेश बताकर वरिष्ठ शिवसेना पदाधिकारियो को बाहर निकालने का फरमान जारी कर दिया गया है। जिससे उत्तराखंड के पहाड़ी मूल के शिवसैनिको में आक्रोश पनप रहा है। शिवसैनिको का कहना है कि जिस प्रकार उद्धव ठाकरे ने अपना बौद्धिक और मानसिक संतुलन खोने की वजह से शिवसेना की आत्मा सच्चे हिंदुत्व वाली पार्टी को कांग्रेस के साथ गठबंधन करके बाला साहेब ठाकरे और लाखों शिवसैनिकों के साथ कुठाराघात किया, ठीक उसी प्रकार नव नियुक्त राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति ने शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन अभिजीत अदशूल को विश्वास में लेकर पहाड़ और मैदान का एक प्रोपेगंडा बनाकर शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारी उप राज्य प्रमुख राकेश सकलानी, राज्य सचिव उमेश बिष्ट एंव जिला प्रमुख भानुप्रताप को बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बाहर दिया है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अपने वरिष्ठ प्रभारी को भी उनके अधिकारियों के विषय में विवेचना की, क्योंकि उसकी असली वजह थी कि एक सप्ताह पूर्व राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति को एक कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। जिसमे उन पर आरोप थे। बकायदा साक्ष्यों के साथ उनके द्वारा न तो संतोषजनक कार्य किया जा रहा है, और उन्ही के द्वारा नियुक्त पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ उनका शुरू से ही दुर्भावना पूर्ण व्यवहार एवं भाषा का प्रयोग करना है।
सबसे बड़ा कारण उनके द्वारा राज्य प्रमुख के पद पर रहते हुए अपनी निजी संस्था का संचालन किया जाना और अपने पद के प्रभाव द्वारा सभी शिवसैनिकों को अपनी विश्व हिंदू संस्था ज्वाइन करवाने का दबाव बनाना, उन्हेे नियुक्ति पत्र देकर उनसे हिंदू संस्था के नाम से धन एकत्र करवाना, जो कि शिवसेना के नियम विरुद्ध किया जा रहा कृत्य है। इसके अतिरिक्त जिन पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया और सवाल उठाए उन्हे पार्टी से अकारण बाहर किया जा रहा है। जिसकी जांच राज्य प्रभारी भूपेंद्र भट्ट जी द्वारा राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाते हुए की जा रही है। और देवेंद्र प्रजापति से जवाब भी तलब किया गया है, जो पूर्ण रूप से असंतोषजनक व निराधार पाया गया है। जिस पर पंत प्रमुख एवं राष्ट्रीय सचिव का फैसला आना बाकी है। फिर भी शिवसेना उत्तराखंड के सभी शिवसैनिक केंद्रीय नेतृत्व से भी नाखुश हैं और कार्यवाही न होने पर शिवसेना को छोड़ने की बात भी कह रहे है। फिलहाल देवेंद्र प्रजापति के दिए गए इस बयान को और कार्यवाही को निराधार, उनका व्यक्तिगत द्वेष भावना से दिया गया बयान करार दिया गया है। इस बात का खण्डन राज्य समन्वायक /प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र भट्ट ने राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाते हुए इन सभी न्यूज और दुर्भाग्यपूर्ण बयान का खण्डन किया है सभी पदाधिकारियों की यथास्थिति बरकरार रहेगी।
पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त देवेंद्र प्रजापति द्वारा कार्यवाही से बचने हेतु खुद का पाक-साफ ठहराने हेतु दिया गया झूठा बयान जिसमें पहाड़ के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का अपमान किया गया, उन्हे बिना किसी कारण बताओ नोटिस के पार्टी से ये कहकर बाहर करने का बयान, राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अदसुल के आदेश पर की गई कार्यवाही बताया गया। जबकि सूत्रों का कहना है कि देवेंद्र प्रजापति राज्य प्रमुख बनकर तीन माह पूर्व आए थे। उससे पूर्व राज्य प्रमुख राहुल चौहान के खिलाफ भी उन्होंने इसी प्रकार के षड़यंत्र रच कर उन्हे पद मुक्त कर खुद उस पद पर आसीन हो गए और अपनी निजी विश्व हिंदू संस्था को संचालित कर सभी शिवसैनिको को गुप्त रूप से उसकी सदस्यता दिलाते हुए सभी शिवसेना के कार्यकर्ताओं एवं अधिकारियों पर विश्व हिंदू संस्था में भी नियुक्ति के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया गया। जिन शिवसेनिकों ने इसका विरोध करना चाहा उन्हे शिवसेना से या तो बाहर कर दिया गया या पदमुक्त कर दिया गया जिसके पुख्ता सबूत राज्य प्रभारी प्रदेश कार्यकारणी एवं राष्ट्रीय नेतृत्व को भेज दिए गए और कारण बताओ नोटिस भेज कर देवेंद्र प्रजापति से जवाब तलब किया गया इसलिए पद में रहते अपने पद का दुरुपयोग करना पार्टी में रहते दूसरे संगठन में सक्रियता से कार्य करना और धन इकट्ठा करना पार्टी विरोध गतिविधि माना गया है। जिसके चलते कार्यवाही से बचने हेतु खुद का सच्चा साबित करने हेतु देवेंद्र प्रजापति द्वारा लिए जा रहे असंवैधानिक निर्णय और बयानों के चलते पहाड़ी मूल मैदानी के बीच विवाद उत्पन करने की साजिश एवं दुर्भाग्यपूर्ण बयान के चलते सभी पहाड़ के शिवसैनिको में भारी रोष व्याप्त है। राष्ट्रीय नेतृत्व से तत्काल कार्यवाही हेतु मांग की जा रही है। सभी लोग सीधे राष्ट्रीय सचिव से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
शिवसेना को में आक्रोश पनप रहा है। संगठन के अंदर शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव के पहाड़ी बनाम मैदानी मुद्दे को लेकर दिए गए एक बयान ने तूल पकड़ लिया है। उत्तराखंड शिवसेना के प्रदेश प्रमुख महासचिव अखिल शर्मा एडवोकेट ने बताया कि राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति ने अनर्गल एवं बेबुनियाद आरोप लगाकर निराधार तथ्यों को न्यूज के माध्यम से पहाड़ी मूल के कर्मठ शिवसैनिकों को राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अदसूल का आदेश बताकर वरिष्ठ शिवसेना पदाधिकारियो को बाहर निकालने का फरमान जारी कर दिया गया है। जिससे उत्तराखंड के पहाड़ी मूल के शिवसैनिको में आक्रोश पनप रहा है। शिवसैनिको का कहना है कि जिस प्रकार उद्धव ठाकरे ने अपना बौद्धिक और मानसिक संतुलन खोने की वजह से शिवसेना की आत्मा सच्चे हिंदुत्व वाली पार्टी को कांग्रेस के साथ गठबंधन करके बाला साहेब ठाकरे और लाखों शिवसैनिकों के साथ कुठाराघात किया, ठीक उसी प्रकार नव नियुक्त राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति ने शिवसेना के राष्ट्रीय सचिव कैप्टन अभिजीत अदशूल को विश्वास में लेकर पहाड़ और मैदान का एक प्रोपेगंडा बनाकर शिवसेना के वरिष्ठ पदाधिकारी उप राज्य प्रमुख राकेश सकलानी, राज्य सचिव उमेश बिष्ट एंव जिला प्रमुख भानुप्रताप को बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बाहर दिया है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अपने वरिष्ठ प्रभारी को भी उनके अधिकारियों के विषय में विवेचना की, क्योंकि उसकी असली वजह थी कि एक सप्ताह पूर्व राज्य प्रमुख देवेंद्र प्रजापति को एक कारण बताओ नोटिस भेजा गया था। जिसमे उन पर आरोप थे। बकायदा साक्ष्यों के साथ उनके द्वारा न तो संतोषजनक कार्य किया जा रहा है, और उन्ही के द्वारा नियुक्त पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ उनका शुरू से ही दुर्भावना पूर्ण व्यवहार एवं भाषा का प्रयोग करना है।
सबसे बड़ा कारण उनके द्वारा राज्य प्रमुख के पद पर रहते हुए अपनी निजी संस्था का संचालन किया जाना और अपने पद के प्रभाव द्वारा सभी शिवसैनिकों को अपनी विश्व हिंदू संस्था ज्वाइन करवाने का दबाव बनाना, उन्हेे नियुक्ति पत्र देकर उनसे हिंदू संस्था के नाम से धन एकत्र करवाना जो कि शिवसेना के नियम विरुद्ध किया जा रहा कृत्य है। इसके अतिरिक्त जिन पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया और सवाल उठाए उन्हे पार्टी से अकारण बाहर किया जा रहा है। जिसकी जांच राज्य प्रभारी भूपेंद्र भट्ट जी द्वारा राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाते हुए की जा रही है। और देवेंद्र प्रजापति से जवाब भी तलब किया गया है, जो पूर्ण रूप से असंतोषजनक व निराधार पाया गया है। जिस पर पंत प्रमुख एवं राष्ट्रीय सचिव का फैसला आना बाकी है। फिर भी शिवसेना उत्तराखंड के सभी शिवसैनिक केंद्रीय नेतृत्व से भी नाखुश हैं और कार्यवाही न होने पर शिवसेना को छोड़ने की बात भी कह रहे है। फिलहाल देवेंद्र प्रजापति के दिए गए इस बयान को और कार्यवाही को निराधार, उनका व्यक्तिगत द्वेष भावना से दिया गया बयान करार दिया गया है। इस बात का खण्डन राज्य समन्वायक /प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र भट्ट ने राष्ट्रीय नेतृत्व के संज्ञान में लाते हुए इन सभी न्यूज और दुर्भाग्यपूर्ण बयान का खण्डन किया है सभी पदाधिकारियों की यथास्थिति बरकरार रहेगी।
पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त देवेंद्र प्रजापति द्वारा कार्यवाही से बचने हेतु खुद का पाक-साफ ठहराने हेतु दिया गया झूठा बयान जिसमें पहाड़ के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का अपमान किया गया, उन्हे बिना किसी कारण बताओ नोटिस के पार्टी से ये कहकर बाहर करने का बयान, राष्ट्रीय सचिव अभिजीत अदसुल के आदेश पर की गई कार्यवाही बताया गया। जबकि सूत्रों का कहना है कि देवेंद्र प्रजापति राज्य प्रमुख बनकर तीन माह पूर्व आए थे। उससे पूर्व राज्य प्रमुख राहुल चौहान के खिलाफ भी उन्होंने इसी प्रकार के षड़यंत्र रच कर उन्हे पद मुक्त कर खुद उस पद पर आसीन हो गए और अपनी निजी विश्व हिंदू संस्था को संचालित कर सभी शिवसैनिको को गुप्त रूप से उसकी सदस्यता दिलाते हुए सभी शिवसेना के कार्यकर्ताओं एवं अधिकारियों पर विश्व हिंदू संस्था में भी नियुक्ति के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया गया। जिन शिवसेनिकों ने इसका विरोध करना चाहा उन्हे शिवसेना से या तो बाहर कर दिया गया या पदमुक्त कर दिया गया जिसके पुख्ता सबूत राज्य प्रभारी प्रदेश कार्यकारणी एवं राष्ट्रीय नेतृत्व को भेज दिए गए और कारण बताओ नोटिस भेज कर देवेंद्र प्रजापति से जवाब तलब किया गया इसलिए पद में रहते अपने पद का दुरुपयोग करना पार्टी में रहते दूसरे संगठन में सक्रियता से कार्य करना और धन इकट्ठा करना पार्टी विरोध गतिविधि माना गया है। जिसके चलते कार्यवाही से बचने हेतु खुद का सच्चा साबित करने हेतु देवेंद्र प्रजापति द्वारा लिए जा रहे असंवैधानिक निर्णय और बयानों के चलते पहाड़ी मूल मैदानी के बीच विवाद उत्पन करने की साजिश एवं दुर्भाग्यपूर्ण बयान के चलते सभी पहाड़ के शिवसैनिको में भारी रोष व्याप्त है। राष्ट्रीय नेतृत्व से तत्काल कार्यवाही हेतु मांग की जा रही है। सभी लोग सीधे राष्ट्रीय सचिव से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
