देहरादून में उर्दू दिवस कॉन्फ़्रेंस और मुशायरा का आयोजन — इक़बाल की याद में मोहब्बत और तहज़ीब का संगम

रिपोर्ट : अमानुल्लाह उस्मानी

देहरादून : मशहूर शायर अल्लामा इक़बाल (रह.) की जयंती और उत्तराखंड राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर देहरादून में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय उर्दू दिवस कॉन्फ़्रेंस और मुशायरा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. रियाज़ुल हसन सिद्दीकी अलीगढ़ के आवास माशाअल्लाह मंज़िल (वन विहार कॉलोनी, शिमला बायपास) में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत से हुई। संचालन डॉ. अब्दुल रब और शादाब अली ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर नदीम बरनी ने की, जबकि एफ.एम. चैनल निदेशक मनीष भट्ट मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने उर्दू भाषा के प्रति अपने प्रेम और लगाव को व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध शायर ज़िया-उल-हसन ज़िया नेहटोरी की मौजूदगी ने महफ़िल में चार चाँद लगा दिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं डॉ. एस.ए. अंसारी, राव नसीम, हिमाचल न्यूज़ की इंद्राणी पांडे, अंबिका रूही और सैयद उवैस अहमद ने उर्दू भाषा के विकास और इसकी सांस्कृतिक मजबूती पर अपने विचार रखे।

दूसरे सत्र में युवा शायरा मोनिका मंताशा ने अपनी ग़ज़लों और नज़्मों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इक़बाल अज़र, सतीश बंसल, डॉ. सुहैल अहमद, इनाम रम्ज़ी, इफ्तिखार सागर (पुरकाज़ी), कवि अरोड़ा और खुर्शीद सिद्दीकी ने भी अपनी शायरी से तालियाँ बटोरीं। खुर्शीद सिद्दीकी की नातिया कलाम ने महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और आम नागरिकों ने शिरकत की। जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. मुख्तार अहमद, डॉ. इमरान अहमद, मेराज अहमद, डॉ. शगुफ्ता जहां, डॉ. सलमान अलीगढ़, लेफ्टिनेंट मोहम्मद सलीम, डॉ. जमशेद उस्मानी, इंजीनियर मुश्ताक अहमद अलीगढ़ और एडवोकेट सैयद हैदर अली सहित कई सम्मानित हस्तियाँ शामिल थीं।

कार्यक्रम का समापन इस नारे के साथ हुआ — उर्दू हमारी पहचान है, हमारी संस्कृति है और मोहब्बत का ज़रिया है। देहरादून की इस उर्दू शाम ने, इक़बाल के पैग़ाम की तरह, सबके दिलों पर गहरी छाप छोड़ दी।