विकासनगर (बिलाल अंसारी)-
राजधानी देहरादून के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कई निजी स्कूलों में बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए ऐसे शिक्षकों को नियुक्त किया जा रहा है, जो न तो प्रशिक्षित हैं और न ही उनके पास शिक्षा के क्षेत्र का आवश्यक अनुभव है। कहीं हाईस्कूल पास युवक-युवतियां शिक्षक बने हुए हैं तो कहीं इंटर पास लोग गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय पढ़ा रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके मानसिक विकास पर पड़ रहा है।

अभिभावक अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने की उम्मीद में भारी-भरकम फीस देकर उन्हें निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन उनकी इस मजबूरी और भरोसे का गलत फायदा उठाता है। योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों को रखने के बजाय सस्ते और कम योग्य लोगों से पढ़ाई करवाई जाती है। इससे स्कूल का खर्च भी कम हो जाता है और प्रबंधन को ज्यादा मुनाफा होता है, लेकिन इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन स्कूलों में शिक्षा विभाग की ओर से कोई नियमित निरीक्षण भी नहीं किया जाता। वर्षों तक स्कूल बिना किसी जांच के चलते रहते हैं। न तो शिक्षकों की डिग्री की जांच होती है और न ही यह देखा जाता है कि बच्चों को सही ढंग से पढ़ाया जा रहा है या नहीं। कई जगह तो स्कूल सिर्फ नाम के लिए चल रहे हैं – न सही भवन, न पुस्तकालय, न प्रयोगशाला और न ही खेल के मैदान की सुविधा। अप्रशिक्षित शिक्षकों की वजह से बच्चों की बुनियाद ही कमजोर हो रही है। वे विषयों को सही ढंग से समझ नहीं पाते, जिससे उनका आत्मविश्वास कम हो जाता है। कई बच्चे पढ़ाई से अरुचि लेने लगते हैं और धीरे-धीरे स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति पूरे समाज और देश के भविष्य के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि आज के बच्चे ही कल के नागरिक और देश के निर्माता हैं।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की जल्द से जल्द जांच कराई जाए। हर स्कूल में केवल प्रशिक्षित और मान्यता प्राप्त शिक्षकों की ही नियुक्ति होनी चाहिए। जिन स्कूलों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा का स्तर सुधर सके। जरूरत इस बात की है कि सरकार और शिक्षा विभाग इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और यह सुनिश्चित करे कि हर बच्चे को सही मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि समाज और देश के भविष्य की नींव है। अगर इस नींव को ही कमजोर कर दिया गया, तो आने वाली पीढ़ी कभी मजबूत नहीं बन पाएगी।
