
देहरादून (डॉ बिलाल अंसारी)-
गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन और कथित कब्जे से जुड़े विवाद में पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गरमाता जा रहा है। पत्रकारों का आरोप है कि जमीन से जुड़े कथित कब्जे और उससे संबंधित सवालों को उठाने के बाद उन्हें ही मुकदमे में फंसा दिया गया। इसी मामले को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले में सभी पक्षों को सुना जाए और जमीन से जुड़े मूल तथ्यों की जांच की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि किसी पत्रकार के खिलाफ शिकायत है तो कानून के तहत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन किसी एक पक्ष की शिकायत के आधार पर कार्रवाई किए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं।
बताया जा रहा है कि पूरा मामला गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन तथा फौजी से संबंधित बताई जा रही जमीन पर कथित कब्जे और उसे अन्य लोगों को बेचे जाने के आरोपों से जुड़ा है। पत्रकारों की ओर से इस मामले को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों और तहसील प्रशासन को शिकायत एवं ज्ञापन के माध्यम से जानकारी दिए जाने की बात कही गई है।
पत्रकारों का आरोप है कि जमीन संबंधी शिकायतों की जांच किए जाने के बजाय मामले को दूसरी दिशा में ले जाया गया और कथित लेनदेन के विवाद को ब्लैकमेलिंग के मामले के रूप में प्रस्तुत करते हुए पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पत्रकारों का पक्ष पर्याप्त रूप से नहीं सुना। उनका कहना था कि जमीन के स्वामित्व, दस्तावेजों, कथित कब्जे और बिक्री से जुड़े आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने मांग की कि संबंधित जमीन के दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए तथा सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं। साथ ही पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की भी निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की मांग की गई। पत्रकारों की ओर से दावा किया गया है कि गोल्डन फॉरेस्ट की जमीन तथा कथित कब्जे और बिक्री के संबंध में तहसील प्रशासन को पहले ही ज्ञापन देकर मामले से अवगत कराया गया था। आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और इसके बजाय पत्रकारों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इसी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसपी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे डॉ. हरक सिंह रावत और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव, दबाव अथवा अन्य किसी कारण से संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि जांच में पत्रकारों के खिलाफ लगाए गए आरोप गलत पाए जाते हैं या किसी प्रकार की साजिश सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
गोल्डन फॉरेस्ट जमीन विवाद और पत्रकारों पर दर्ज मुकदमे के मामले में अब कई सवाल सामने हैं। क्या संबंधित जमीन के दस्तावेजों की पूरी जांच होगी? क्या कथित कब्जे और जमीन की बिक्री के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? पत्रकारों की ओर से पूर्व में दिए गए ज्ञापनों पर क्या कार्रवाई हुई? और क्या मुकदमा दर्ज करने से पहले सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सुना गया?
इन सवालों के जवाब पुलिस और प्रशासन की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल एसपी कार्यालय के घेराव के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर पुलिस प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है। खबर में उल्लेखित आरोप संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है। मामले से जुड़े अन्य पक्षों का पक्ष अथवा जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा।
