शिंदे गुट ही असली शिवसेना: महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष

मुंबई/ देहरादून : शिवसेना विधायकों की अयोग्यता को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपना फैसला सुना दिया है। महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने उद्धव गुट को बहुत बड़ा झटका दिया है। स्पीकर नार्वेकर का फैसला शिंदे गुट के पक्ष में आया है। राहुल नार्वेकर ने विधायकों की सदस्यता बरकरार रखी है। उद्धव गुट की मांग को स्पीकर ने खारिज कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष ने अपने फैसले में बताया कि ‘एकनाथ शिंदे गुट ही असली शिवसेना है।’
राहुल नार्वेकर ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि ‘शिवसेना का 1999 का संविधान ही मान्य है। चुनाव आयोग रिकॉर्ड में सीएम शिंदे गुट असली पार्टी है। चुनाव आयोग के फैसले को ध्यान में रखा गया है। मैं चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से बाहर नहीं जा सकता। उद्धव गुट दलील में दम नहीं है। शिवसेना अध्यक्ष को शक्ति नहीं है। शिंदे को नेता पद से नहीं हटा सकते थे। उद्धव ठाकरे एकनाथ शिंदे को नहीं हटा सकते थे और उद्धव ठाकरे अकेले निर्णय नहीं ले सकते थे। कार्यकारिणी की बैठक नहीं बुलाई गई. बहुमत का फैसला लागू होना चाहिए था। 2018 का फैसला संविधान के अनुसार नहीं था।

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा कि पार्टी के संविधान को लेकर दोनों गुटों के बीच मतभेद की शिकायत चुनाव आयोग में दाखिल की गई है। संविधान का आधार यह बताने के लिए लिया गया है कि असली शिवसेना कौन है? चुनाव आयोग का फैसला पार्टी के संविधान पर आधारित है. 2018 में संविधान में जो संशोधन हुआ, उसका पूरा विचार पार्टियों को था। उस वक्त जो संविधान संशोधन हुआ, वह सभी की सहमति से हुआ है। लेकिन चुनाव आयोग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। इस संबंध में इस संविधान को ध्यान में नहीं रखा जाएगा। बल्कि 1999 के पुराने संविधान को ध्यान में रखा जाएगा। “महाराष्ट्र की राजनीति के लिए आज बड़ा दिन है।

शिंदे के नेतृत्व में विधायकों की बगावत के चलते जून 2022 में शिवसेना विभाजित हो गई थी। उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाने की समय-सीमा 31 दिसंबर, 2023 तय की थी लेकिन उससे कुछ दिन पहले 15 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने अवधि को 10 दिन बढ़ाकर फैसला सुनाने के लिए 10 जनवरी की नयी तारीख तय की गई थी।

शिवसेना उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष विधि प्रकोष्ठ अखिल शर्मा द्वारा आज एक बयान जारी करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा पारित उक्त आदेश का स्वागत करते हुए कहा गया है कि यह सत्य और लोकतंत्र की विजय है। इस निर्णय द्वारा संपूर्ण भारतवर्ष में शिवसेना कार्यकर्ताओं एंव शिव सैनिकों के मध्य एक विश्वास एवं उल्लास की नहर दौड़ गई है। जिसका परिणाम आने वाले लोकसभा चुनाव एवं प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के परिणाम के रूप में स्पष्ट नजर आएगा।