सहसपुर (बिलाल अंसारी) –
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद तहसील विकासनगर सहसपुर थानाक्षेत्र के बड़ा रामपुर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रो में रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका गंभीर असर दिखाई दे रहा है। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और राहगीर दिन-रात डर के साए में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह और शाम के समय जब लोग काम पर जाते हैं या बच्चे स्कूल के लिए निकलते हैं, तब झुंड में घूम रहे आवारा कुत्ते उन पर हमला कर देते हैं। कई बार तो लोग केवल डर के कारण घर से बाहर निकलने में भी हिचकिचाते हैं। हाल के दिनों में कई लोगों को काटे जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और उनके लिए उचित प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए, पर जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था पूरी तरह नाकाम नजर आ रही है। बुजुर्गों और महिलाओं का कहना है कि पहले बच्चे शाम के समय खुले में खेलते थे, लेकिन अब माता-पिता उन्हें बाहर भेजने से डरते हैं। खेतों में काम करने वाले किसान भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय कुत्तों का झुंड गांव की गलियों में घूमता रहता है और किसी भी अजनबी या गुजरने वाले व्यक्ति पर हमला कर देता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, उनकी नसबंदी और टीकाकरण कराया जाए, साथ ही गांवों में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं ताकि लोग सुरक्षित रह सकें। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस पर सख्ती से अमल नहीं होता, तब तक क्षेत्र के लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगे।
अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन कब तक इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करता है और लोगों को इस डर के माहौल से राहत दिला पाता है।
