विकासनगर के ढकरानी में आग लगने से मचा हड़कंप, फायर ब्रिगेड ने घंटो की मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू

विकासनगर (बिलाल अंसारी) : गर्मी शुरू होते ही आगज़नी की घटनाओं ने भी अपना विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है। पछवादून में आग लगने की घटनाओं में अभी से वृद्धि देखने को मिल रही है।
आज अचानक विकासनगर के ढकरानी में दोपहर के समय एक कबाड़ी के गोदाम में आग लगने से अफरा तफरी का माहौल पैदा हो गया। ग्रामीणों ने आग लगने की सूचना डाकपत्थर फायर स्टेशन को दी। आग लगने की सूचना पर फायर सर्विस की दो गाड़ियां घटनास्थल पर पंहुची। फायर कर्मियों व ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गोदाम मे रखे कबाड़ और कारों स्क्रैप के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। आग लगने से गोदाम में रखा दर्जनों कारों का स्क्रैप और अन्य सामान जलकर राख हो गया। आग इतनी भयंकर थी कि धुएं का काला गुब्बार आसमान मे छा गया। आग की उठती लपटों से गोदाम के पास खड़े हरे पेड़ भी झुलस गये। गनीमत यह रही की इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

फायर स्टेशन डाकपत्थर के इंचार्ज पवन शर्मा ने बताया कि लगभग 11:22 बजे ग्रामीणों ने ढकरानी में आग लगने की सूचना दी। बीती रात्रि को एटनबाग मे भी आग लगी थी। वह खुद वहां पर नुकसान का आंकलन करने पंहुचे थे। यहां आग लगने की सूचना पर एक वाहन डाकपत्थर से मंगवाया। जिसके बाद आग काबू पा लिया गया है। आग लगने के का सभवतः गोदाम के पास ही वर्कशॉप है वहां पर कोई कार्य करते हुए चिंगारी निकलने से आग लगने का अनुमान है। आग लगने से लाखों रूपये का नुकसान हो गया है।

कबाड़ के गोदामों में ज्वलनशील सामग्री जैसे प्लास्टिक, कागज, रबर, तेल, गत्ता और पुराने कपडे आदि बड़ी मात्रा में रखे जाते हैं। इन सामग्रियों को व्यवस्थित ढंग से नहीं रखा जाता। अधिकतर इन गोदामों में आग से बचाव के लिए उचित सुरक्षा उपाय जैसे अग्निशमन यंत्र व पानी की व्यवस्था की भी व्यवस्था नहीं होती। बिजली के तारों की खराब वायरिंग या शॉर्ट सर्किट भी आग लगने का बड़ा कारण बन जाती है। प्रशासन की ओर से गोदामों के लिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया जाता। जैसे कि घनी आबादी में कबाड़ गोदामों को अनुमति देना या नियमित जाँच न करना भी आग लगने की घटनाओं को बढ़ावा देता है। गौरतलब है कि विकासनगर ढकरानी के आलावा सेलाकुई व सहसपुर में भी घनी आबादी के बीच बड़ी संख्या में अवैध गोदाम संचालित किये जा रहे हैं। जिनका कूड़ा अदिकतर खुले आसमान के नीचे या पवित्र नदियों में फेंका जा रहा है। कबाड़ के अधिकतर गोदामों पर अग्निशमन यंत्र भी उपलब्ध नहीं हैं। सवाल यह है कि प्रशासन आखिर कब ऐसे अवैध गोदामों पर कार्रवाई करेगा जो आम लोगो की जान के दुश्मन बने हुए हैं ?