किताबों की जगह नशा और बाल मजदूरी: आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की मासूम बच्चों पर क्यों नहीं पड़ती नजर, बाल कल्याण एवं पुनर्वास व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, कब मिलेगा हर बच्चे को सुरक्षित बचपन और शिक्षा का अधिकार

देहरादून (डॉ बिलाल अंसारी)-

भारत में बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है, लेकिन यह भविष्य आज कई जगहों पर अंधेरे में भटकता दिखाई देता है। देश का हर बच्चा पढ़-लिखकर अपने सपनों को पूरा करना चाहता है। लेकिन आज भी हमारे आसपास बड़ी संख्या में सड़कों, बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसे अनेक मासूम बच्चे दिखाई देते हैं, जिनके हाथों में किताबों की जगह मजदूरी के औजार हैं और कई बच्चे कम उम्र में ही नशे की गिरफ्त में पहुंच चुके हैं। कोई होटल में बर्तन मांज रहा है, कोई चाय की दुकान पर काम कर रहा है, तो कोई कूड़ा बीनकर अपना और अपने परिवार का पेट भरने की कोशिश कर रहा है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि कुछ बच्चे नशे के आदी बनते जा रहे हैं। ऐसे हालात देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इन बच्चों पर जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ती?

देश में बाल मजदूरी रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून बनाए गए हैं। सरकार ने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए अनेक योजनाएं भी लागू की हैं। जिला स्तर पर बाल कल्याण समिति, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी तय है कि संकट में फंसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। लेकिन जब खुलेआम छोटे-छोटे बच्चे काम करते और नशे की गिरफ्त में दिखाई देते हैं, तो इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

गरीबी, पारिवारिक मजबूरी, अशिक्षा और जागरूकता की कमी बच्चों को मजदूरी की ओर धकेलती है। वहीं गलत संगत और नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता उन्हें नशे की दलदल में पहुंचा देती है। कम उम्र में नशे की लत उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य तीनों को नुकसान पहुंचाती है। यदि समय रहते इन्हें इस स्थिति से बाहर नहीं निकाला गया, तो ये बच्चे आगे चलकर अपराध और शोषण का भी शिकार हो सकते हैं।

केवल अभियान चलाकर कुछ बच्चों को बचा लेना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि उनका स्थायी पुनर्वास हो, उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाए, परिवार को आवश्यक सहायता मिले और उनकी नियमित निगरानी की जाए। यदि बचाए गए बच्चे फिर उसी माहौल में लौट जाते हैं, तो यह पुनर्वास व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।

इस समस्या के समाधान में समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे से मजदूरी कराता है या बच्चों को नशे की ओर धकेलता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं आम नागरिकों को भी ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके। बाल मज़दूरी के अधिकतर मामलों में अधिकारियों का उदासीन रवय्या भी बाल अपराधों में बराबर का ज़िम्मेदार है।

हर बच्चे का अधिकार है कि वह स्कूल जाए, सुरक्षित वातावरण में रहे और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर पाए। यदि किताबों की जगह बच्चे मजदूरी करेंगे और नशे की गिरफ्त में फंसेंगे, तो यह केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार विभाग, प्रशासन और समाज मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि हर बच्चे के हाथ में मजदूरी के औजार नहीं, बल्कि शिक्षा की किताबें हों और उनका बचपन सुरक्षित तथा खुशहाल बन सके।

सरकार समय-समय पर बाल संरक्षण और पुनर्वास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित करती है। जिला स्तर पर बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय हैं। इन संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त बच्चों की पहचान करना, उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना, शिक्षा से जोड़ना और उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है। लेकिन जब बड़ी संख्या में बच्चे खुलेआम मजदूरी करते और नशे की गिरफ्त में दिखाई देते हैं, तो स्वाभाविक रूप से इन व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।
यह भी जरूरी है कि आम नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान और प्रभावी हो। यदि किसी क्षेत्र में बाल मजदूरी या बच्चों के नशे की समस्या दिखाई देती है, तो संबंधित विभाग तुरंत सक्रिय हों और निर्धारित समय में कार्रवाई करें। इससे लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा और बच्चों की सुरक्षा भी बेहतर होगी।
आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं, विद्यालय, अभिभावक और आम नागरिक सभी मिलकर इस दिशा में गंभीर प्रयास करें। जब तक हर जिम्मेदार संस्था अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से नहीं निभाएगी, तब तक नशे और बाल मजदूरी की गिरफ्त में फंसे मासूम बच्चों का बचपन सुरक्षित नहीं हो सकेगा।