देहरादून (बिलाल अंसारी)-
राजधानी देहरादून के प्रेमनगर में टोंस नदी पर 16 करोड़ की लागत से बना पुल मात्र 16 दिन में ही धराशाही हो गया। पुल टूटने के कारण हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कांग्रेस उपाध्यक्ष आर्येंद्र शर्मा ने पुल के क्षतिग्रस्त होने पर चिंता जताई। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण और कमीशन खोरी का जीता-जागता प्रमाण बताया। बीती 7 जुलाई को भी कांग्रेस उपाध्यक्ष आर्येंद्र शर्मा ने पुल का निरीक्षण किया था। उस समय भी आर्येंद्र शर्मा द्वारा पुल निर्माण में घटिया सामग्री लगाने के आरोप लगाए गए थे। संभावित दुर्घटना की आशंका को देखते हुए उन्होंने सरकार और प्रशासन को सार्वजनिक रूप से आगाह किया था लेकिन उनकी चेतावनी को नजर अंदाज कर दिया गया था। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा है कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए की इस बर्बादी का जवाब कौन देगा और इसकी जिम्मेदारी किसकी है ?

उधर उत्तराखंड आम आदमी पार्टी ने प्रेम नगर मैं टोंस नदी पर बने 16 करोड रुपए की लागत से पुल के क्षतिग्रस्त होने पर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी की अध्यक्ष उमा सिसोदिया और महासचिव श्याम बाबू पांडे द्वारा मौके पर जाकर क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी उनकी गुणवत्ता इतनी घटिया है कि पहली बरसात में पानी में डूब गया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने प्रदेश को माफिया शराब माफिया, नकल माफिया और कमीशन खोरों के हवाले कर दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पुल निर्माण में हुई धांधली की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्यवाही की जाए। जिम्मेदार मंत्री और विभाग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और जनता के पैसे की भरपाई बीजेपी सरकार के खजाने से की जाए।

विधायक सहदेव पुंडीर ने भी मौके पर पहुंचकर जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के कारणों की तकनीकी जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षतिग्रस्त रोड का कार्य तत्काल युद्धस्तर पर प्रारंभ कर सुरक्षित आवागमन शीघ्र बहाल किया जाए।
इसके अलावा जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भी क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया।
अब देखना यह है कि पुल के दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई हो पायेगी या हमेशा कि तरह यह फाइल भी भ्रस्टाचार के कूड़ेदान में गायब हो जाएगी ?
