मुख्यमंत्री धामी की घोषणाओं पर मुख्य सचिव सख्त, लंबित मामलों को जल्द पूरा करने के निर्देश

देहरादून(डॉ बिलाल अंसारी)-
उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लंबित घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित घोषणाओं का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल 4611 मुख्यमंत्री घोषणाओं में से 2852 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1759 घोषणाएं अभी तक लंबित हैं। इनमें 1397 घोषणाओं पर अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई चल रही है। 59 घोषणाएं आंशिक रूप से पूरी हो चुकी हैं, जबकि 303 घोषणाएं अभी भी लंबित हैं। इसके अलावा 447 घोषणाओं को विलोपित या मर्ज करने की प्रक्रिया की गई है।

मुख्य सचिव ने बताया कि 11 अगस्त 2026 को लंबित घोषणाओं की संख्या 627 थी, जो अब घटकर 303 रह गई है। उन्होंने अधिकारियों को शेष घोषणाओं पर भी तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घोषणाओं को पूरा करने में भूमि हस्तांतरण सहित अन्य प्रक्रियाओं के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। जहां संभव हो, विभिन्न कार्यों को समानांतर रूप से शुरू किया जाए, ताकि समय की बचत हो और योजनाएं निर्धारित समय में पूरी हो सकें। मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति को लगातार पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सचिव और अपर सचिव स्तर के अधिकारियों से घोषणाओं की नियमित निगरानी करने को कहा। अगली समीक्षा बैठक अक्टूबर माह के मध्य में आयोजित की जाएगी।

बैठक में मुख्य सचिव ने सम्पूर्ण यमुनोत्री ट्रेक रूट के सुधार की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण देने को कहा गया। ट्रेक रूट के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने ईको पार्क सहित अन्य परिसंपत्तियों के निर्माण के साथ उनके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था पहले से तय करने को कहा। पौड़ी शहर की हेरिटेज स्ट्रीट और मल्टीस्टोरी पार्किंग से जुड़े प्रस्तावों पर भी तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि एक ही क्षेत्र में अलग-अलग विभागों द्वारा किए जा रहे विकास और सौंदर्यीकरण के कार्यों को आपसी समन्वय से एकीकृत रूप में किया जाए। इसके साथ ही फलों के भंडारण के लिए बनने वाले कोल्ड स्टोरेज में उपयुक्त भूमि का चयन करने और प्रदेश के शहरों में ओपन स्पेस, सिटी पार्क और ईको पार्क जैसी सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया।